Std 9 hindi chapter 11 Nirmanonka Pavan Yug swadhyay | 9th Digest Chapter 11
'वसुधैव कुटुंबकम्' विषय पर समूह में चर्चा कीजिए और
प्रभावशाली मुद्दों को सुनाइए :-
कृति के लिए
आवश्यक सोपान :
• इस सुवचन का
अर्थ बताने के लिए कहें।
• आज के युग
में विश्व शांति की अनिवार्यता के बारेमें पूछें।
• पूरे विश्व
में एकता लाने के लिए आप क्या कर सकते हैं, बताने के लिए प्रेरित
करें।
उत्तर:
वसुधैव
कुटुंबकम जिसका अर्थ "विश्व एक परिवार है," एक दर्शन है जो
वेदों और उपनिषदों सहित प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों से उत्पन्न हुआ है। यह एक
अवधारणा है जिसे दुनिया भर के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों ने अपनाया
है और यह आज भी दुनिया में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कई लोगों के लिए एक
मार्गदर्शक सिद्धांत बना हुआ है।
दिन-प्रतिदिन
हम गरीबी,
असमानता और अन्य कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। तेजी से
बढ़ रही आज की दुनिया में वसुधैव कुटुंबकम और मानवता के मूल्य को समझना बहुत ही
महत्वपूर्ण है। वसुधैव कुटुंबकम की महत्वपूर्णता आज पूरा विश्व समझ रहा है और इसे
बढ़ावा दे रहा है। आज के इस तेजी से बढ़ रही विश्व में वसुधैव कुटुंबकम का महत्व
पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
वसुधैव
कुटुंबकम का संदेश यह है कि प्रत्येक व्यक्ति वैश्विक समुदाय का सदस्य है और सभी
को एक-दूसरे के साथ सम्मान और करुणा का व्यवहार करना चाहिए।
वसुधैव
कुटुंबकम का दर्शन विश्वशांति लिए एक दृष्टिकोण प्रदान करता है जो करुणा, सहयोग, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, विविधता,
समावेशिता, संघर्ष समाधान, पर्यावरणीय प्रबंधन, सामाजिक न्याय, नवाचार और रचनात्मकता के सिद्धांतों पर बनाया गया है। यह प्रेम, दया और सम्मान के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित एक अधिक न्यायसंगत और बेहतर
दुनिया बनाने के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है!
Nirmanonka Pavan Yug class 9 question answer | 9th class hindi Nirmanonka Pavan Yug
"भौतिकता
के उत्थानों में जीवन का उत्थान न भूलें।" इस पंक्ति को अपने शब्दों में
स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आज
सारी दुनिया में भौतिक उन्नति को ही महत्त्व दिया जा रहा। इसीलिए संसार आज
विश्वयुद्ध के कगार पर पहुँच गया है। वह अपनी संस्कृति और संस्कार भूलता जा रहा
है। आज मनुष्य में मानवता की भावना का ह्रास होता जा रहा है। लोग अपने स्वार्थों
के कारण एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं। लोगों में नैतिकता नहीं रह गई है।
यही कारण है कि लोगों के हृदय से दया भावना, लोगों के प्रति
हमदर्दी आदि के भाव गायब होते जा रहे हैं। जीवन मूल्यों के द्वारा ही मानव जीवन का
उत्थान हो सकता है। इसी में सुख-शांति है।
११. निर्माणों के पावन युग में स्वाध्याय | निर्माणों के पावन युग में के प्रश्न उत्तर
उत्तर:
उन्नीस
सौ साठ से अस्सी का कालखंड
- १९६१ - भारतीय
सैनिकों ने गोवा, दमन और दीव के पुर्तगाली क्षेत्रों
पर कब्जा कर लिया।
- १९६२ - भारत-चीन
युद्ध।
- १९६५ - भारत-पाकिस्तान
युद्ध, ताशंकद सम्मेलन।
- १९६९ - बैंकों
का राष्ट्रीयकरण।
- १९७१ - भारत-पाकिस्तान
युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति।
- १९७२ - २ जुलाई
को शिमला समझौते पर हस्ताक्षर।
- १९७४ - पोखरण
में पहला परमाणु परीक्षण।
- १९७५ -
- आपातकालीन स्थिति।
- आर्यभट्ट, भारत का पहला
उपग्रह लॉन्च किया गया।
- बीस सूत्रीय कार्यक्रम की शुरुआत।
उन्नीस
सौ इक्यासी से दो हजार का कालखंड
- १९८४ - भोपाल
गैस दुर्घटना।
- १९८८ - भारतीय
प्रतिभूति विनिमय बोर्ड की स्थापना।
- १९९१ - आर्थिक
सुधार।
- १९९९ - कारगिल
युद्ध।
- २००० - छत्तीसगढ़, उत्तरांचल और झारखंड राज्यों का निर्माण।
दो
हजार एक से अब तक का कालखंड
- २००२ - गुजरात
दंगे।
- २००४ - सुनामी
ने भारत के दक्षिणी and पूर्वी तटों के आसपास भारी तबाही
मचाई।
- २००६ - अमेरिका
और भारत ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- २००८ - चंद्र
मिशन- चंद्रयान-१, २२ अक्टूबर को लॉन्च हुआ।
- २०१३ - मार्स
ऑर्बिटर मिशन।
- २०१६ - भारत
एमटीसीआर का सदस्य बना।
- २०१९ -
- चंद्र मिशन- चंद्रयान-२, २२ जुलाई को लॉन्च हुआ।
- जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा मिला।
- २०२० - २५
मार्च को, भारत सरकार ने कोविड-१९ मामलों में वृद्धि के
कारण देश में पूर्ण तालाबंदी की घोषणा की।
- २०२२ - आपातकालीन
स्थितियों में दो COVID-19 टीकों, Covaxin और Covishield को अधिकृत किया।
- २०२३ - चंद्र
मिशन- चंद्रयान-३ का चंद्रमा पर यशस्वी लैंडिंग।
Nirmanonka Pavan Yug 9th class hindi question answer | Nirmanonka Pavan Yug 9th class hindi workbook answers
'पर्यावरण और मानव' पर आधारित पथनाट्य (नुक्कड़ नाट्य) पढ़कर प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
पात्र: सूत्रधार, विवेक, पर्यावरण (एक मानव आकृति के रूप में),
और ३-४ छात्र (सैलानी और नागरिक)।
(दृश्य की शुरुआत ज़ोर-ज़ोर से डफली बजाने और नारों के साथ होती है। सभी
छात्र गोल घेरे में खड़े होते हैं।)
सब मिलकर
(नारा लगाते हैं):
"सुनो-सुनो ऐ दुनिया वालों, सुनो-सुनो ध्यान लगाओ,
पर्यावरण को
बचाना है,
मिलकर कदम बढ़ाओ!"
सूत्रधार (आगे
आकर): भाइयों और बहनों! आज यवतमाल के स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय के छात्र आपके
सामने एक बेहद गंभीर विषय लेकर आए हैं। हम इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आपको यह
संदेश देने आए हैं कि यदि आज हमने अपने पर्यावरण को सुरक्षित नहीं रखा, तो मानव का जीवन नरक के समान हो जाएगा!
(तभी दो छात्र हाथ में प्लास्टिक की थैलियाँ और कूड़ा लेकर आते हैं और
स्टेज पर लापरवाही से फेंकते हैं।)
विवेक: अरे
भाई! यह क्या कर रहे हो? जहाँ मर्जी आई वहीं कूड़ा-कचरा फेंक
दिया?
पहला छात्र
(हँसते हुए): अरे यार, एक प्लास्टिक की थैली से क्या फर्क पड़ता
है? पूरी दुनिया ही फेंक रही है!
पर्यावरण
(धीमी और दर्दभरी आवाज में आगे आता है): फर्क पड़ता है भाई, बहुत फर्क पड़ता है! मैं इस धरती का पर्यावरण हूँ। तुम इंसानों ने अपनी
सुख-सुविधाओं के लिए पॉलीथीन का अंधाधुंध प्रयोग शुरू कर दिया है। यही प्लास्टिक
मेरी मिट्टी और नदियों को बर्बाद कर रहा है।
दूसरा छात्र: लेकिन
हम तो सिर्फ अपना त्योहार मना रहे थे, नदियों में मूर्तियाँ
विसर्जित कर रहे थे। इसमें क्या गलत है?
पर्यावरण: त्योहार
मनाओ,
लेकिन मेरी नदियों को गंदा मत करो! जब तुम लगातार प्रदूषण बढ़ाते
रहोगे, कूड़ा आदि नदियों में बहाते रहोगे, तो नदियों का पानी ज़हरीला हो जाएगा और अंततः मानव का जीवन खुद खत्म होने
के कगार पर आ जाएगा!
विवेक
(घबराकर): तो क्या इसका कोई उपाय नहीं है? क्या हम अपनी आने वाली
पीढ़ियों को सिर्फ प्रदूषण देंगे?
सूत्रधार: उपाय
है! उपाय बहुत सीधा और सरल है। शहरवासियों को जागरूक होना होगा। हमें पॉलीथीन का
प्रयोग बंद करना होगा, नदियों में मूर्ति विसर्जन और कूड़ा
बहाना रोकना होगा और पेड़ काटने की जगह नए पौधे लगाने होंगे।
(सभी छात्र आगे आकर एक सुर में प्रतिज्ञा लेते हैं।
पहला छात्र: आज से हम प्रतिज्ञा करते हैं कि पॉलीथीन का प्रयोग बिल्कुल नहीं करेंगे!
दूसरा छात्र: हम अपनी पवित्र नदियों में कूड़ा और मूर्तियाँ विसर्जित करके उन्हें प्रदूषित नहीं होने देंगे!
विवेक: हम पेड़ों को कटने से बचाएँगे और हरेक व्यक्ति पौधे लगाकर पर्यावरण को शुद्ध करने में अपना योगदान देगा!
सब मिलकर (एक
साथ नारा लगाते हुए नाटक का समापन करते हैं): "पेड़ लगाओ,
जीवन बचाओ, पॉलीथीन को दूर भगाओ! धरती को
हरा-भरा बनाएँगे, पर्यावरण को शुद्ध बनाएँगे!"
(डफली की थाप के साथ सभी पात्र झुककर प्रणाम करते हैं और मंच से प्रस्थान
करते हैं।)
9th class hindi Nirmanonka Pavan Yug | Nirmanonka Pavan Yug poem bhavarth
'देश हित के लिए आप क्या करते हैं, लिखिए।
उत्तर:
'देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें। पथिकों
को तपती दुपहर में, पेड़ सदा देते हैं छाया, सुमन सुगंध सदा देते हैं, हम सबको फूलों की माला,
औरों का भी हित हो जिसमें, हम ऐसा कुछ करना
सीखें।'
मैं देश हित
के लिए यह सब करती हूँ।
- पानी, बिजली की बचत
करती हूँ।
- हर साल पौधे लगाकर उनकी हिफाजत करती हूँ।
- बिजली का बिल, घरपट्टी,
पानीपट्टी सभी बिल्स वक्त पर भरती हूँ।
- कचरा सही ढंग से कूड़ेदानों में डालती हूँ।
- ज्यादा से ज्यादा नैसर्गिक चीज़ों का इस्तेमाल
करती हूँ।
अपने
आसपास / परिवेश में घटित होने वाली समाज विघातक घटनाओं की रोकथाम से संबंधित अपना
मत प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
भ्रष्टाचार, आरक्षण, भ्रूण-हत्या, दहेज
प्रथा, आदि समाज विघातक घटनाएँ हैं। भ्रष्टाचार भारतीय समाज
में सबसे तेजी से उभरने वाला मुद्दा है। मनुष्य अपने निजी स्वार्थों की खातिर देश
को खोखला कर रहा है। अतः मनुष्य को सदाचार को अपनाना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार
अपने-आप समाप्त हो जाएगा। भ्रूण हत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस विषय पर
स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। लोग कन्या जन्म चाहते ही नहीं है। सबको पुत्र चाहिए।
इस
पर रोक लगाने के लिए चिकित्सा के लिए मजबूत नीति संबंधी नियमावली होनी चाहिए। सभी
महिलाओं के लिए तुरंत शिकायत रजिस्ट्रेशन प्रणाली होनी चाहिए। आम लोगों को जागरूक
करने के लिए कन्या भ्रूण हत्या जागरूकता कार्यक्रम होना चाहिए। दहेज जैसी कुप्रथा
के प्रति लोगों की मानसिकता में ब
(क) निर्माणों के पावन युग में हम इन्हें न भूलें:
(ख) होना जरुरी:
स्वामी
विवेकानंद जी की जीवनी का अंश पढ़कर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
- १२ जनवरी १८६३ -
कलकत्ता में जन्म।
- १८७९ - प्रेसीडेंसी
कॉलेज कलकत्ता में प्रवेश।
- १८८० - जनरल
असेम्बली इंस्टीट्यूशन में प्रवेश।
- नवम्बर १८८१ -
रामकृष्ण परमहंस से प्रथम भेंट।
- १८८२ - रामकृष्ण
परमहंस से सम्बद्ध।
- १८८४ - स्नातक
परीक्षा उत्तीर्ण; पिता का स्वर्गवास।
- १८८५ - रामकृष्ण
परमहंस की अन्तिम बीमारी।
- १६ अगस्त १८८६ -
रामकृष्ण परमहंस का निधन।
- १८८६ - वराहनगर
मठ की स्थापना।
- जनवरी १८८७ -
ब्रङ्गानगर में औपचारिक सन्यास।
- ३० जुलाई १८९३ -
शिकागो आगमन।
- अगस्त १८९३ -
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. जॉन राइट से भेंट।
- ११ सितम्बर १८९३ -
विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में प्रथम व्याख्यान।
- २७ सितम्बर १८९३ -
विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में अन्तिम व्याख्यान।
- १६ मई १८९४ -
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में संभाषण।
- नवंबर १८९४ -
न्यूयॉर्क में वेदान्त समिति की स्थापना।
- जनवरी १८९५ -
न्यूयॉर्क में धार्मिक कक्षाओं का संचालन आरम्भ।
- अगस्त १८९५ -
पेरिस में।
- अक्टूबर १८९५ -
लन्दन में व्याख्यान।
- ६ दिसम्बर १८९५ -
वापस न्यूयॉर्क।
- १८९६ - हार्वर्ड
विश्वविद्यालय में व्याख्यान।
- १८९६ - लंदन
में धार्मिक कक्षाएँ।
- २८ मई १८९६ -
ऑक्सफोर्ड में मैक्समूलर से भेंट।
- ३० दिसम्बर १८९६ -
नेपाल से भारत की ओर रवाना।
- १५ जनवरी १८९७ -
कोलम्बो, श्रीलंका आगमन।
- जनवरी, १८९७ - रामनाथपुरम् (रामेश्वरम) में
जोरदार स्वागत एवं भाषण।
- १ मई १८९७ -
रामकृष्ण मिशन की स्थापना।
- १९ मार्च १८९९ -
मायावती में अद्वैत आश्रम की स्थापना।
- ३१ जुलाई १८९९ -
न्यूयॉर्क आगमन।
- २२ फ़रवरी १९०० -
सैन फ्रांसिस्को में वेदान्त समिति की स्थापना।
- १० जनवरी १९०१ -
मायावती की यात्रा।
- मार्च-मई १९०१ -
पूर्वी बंगाल और असम की तीर्थयात्रा।
- जनवरी-फरवरी १९०२ -
बोध गया और वाराणसी की यात्रा।
- मार्च १९०२ -
बेलूर मठ में वापसी।
- ४ जुलाई १९०२ -
महासमाधि।
9th class hindi chapter 11 Nirmanonka Pavan Yug question answer | std 9 hindi Nirmanonka Pavan Yug question answer
निम्न
शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से ढूंढ़िए तथा उचित शब्द रिक्त स्थानों में
लिखिए :-
1. आर्किमिडीज
ने शून्य की .................... की। (खोज, अनुसंधान, आविष्कार)
2. प्रगति के
लिए आपसी .................... आवश्यक है। (ईर्ष्या, भाईचारा, स्पर्धा)
3. कला को
शुरू करने के लिए अध्यक्ष महोदय की .................... चाहिए। (अनुमति, आज्ञा, आदेश)
4. काले
बादलों को देखकर बारिश की .................... है। (आशंका, संभावना, अवसर)
5.
सड़क-योजना में सैकड़ों मजदूरों को
.................... मिला। (निर्माण, श्रम, रोजगार)
उत्तर
आर्यभट्ट ने
शून्य की खोज की। (खोज, अनुसंधान, आविष्कार)
२. प्रगति के
लिए आपसी स्पर्धा आवश्यक हैं। (ईर्ष्या, भागदौड़, स्पर्धा)
३. कार्यक्रम
को शुरू करने के लिए अध्यक्ष महोदय की अनुमति चाहिए। (अनुमति, आज्ञा, आदेश)
४. काले
बादलों को देखकर बारिश की संभावना है। (आशंका, संभावना, अवसर)
५. सड़क-योजना
में सैकड़ों मजदूरों को रोजगार मिला। (निर्माण, श्रम, रोजगार):
उत्तर:
इस
कविता में लेखक जी ने नूतन अनुसंधान, संस्कृति के सम्मान,
जगत का कल्याण करने के साथ ही चरित्र निर्माण को महत्त्व दिया है।
मनुष्य के चरित्र निर्माण में ही विज्ञान, शिक्षा, नए-नए आविष्कारों इत्यादि की सार्थकता निहित है।
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