कक्षा १० वीं हिंदी पाठ ३ वाह रे ! हमदर्द स्वाध्याय | Class 10 Hindi Vah re Hamdard Full Solutions
Vah re Hamdard question answer Maharashtra state board
10th std Hindi chapter 3 exercise answers
Std 10 Hindi Lokbharati Chapter 3 Vah re Hamdard Swadhyay & Digest Answers
श्रवणीय
सार्वजनिक
अस्पताल में जाकर किसी मरीज से उसके अनुभव सुनिए और अपने शब्दों में सुनाइए।
उत्तर : सार्वजनिक
अस्पतालों में समय पर डॉक्टर भी नहीं मिलते। डॉक्टर यदि मिले तो दवाइयां नहीं
मिलती। मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदने को बाध्य होना पड़ता है।
इसीलिए लोग इन अस्पतालों में जाने से कतराते हैं। यह परेशानियां मरीजों को
सार्वजनिक अस्पतालों में होती हैं।
दहावी हिंदी वाह रे ! हमदर्द स्वाध्याय उत्तरे | इयत्ता दहावी हिंदी वाह रे ! हमदर्द प्रश्न उत्तरे
पठनीय
अस्पताल
में लगे सूचना फलक/ विज्ञापनों को पढ़िए तथा कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
१. अस्पताल में सामान्यतः दिखने
वाले सूचना फलक एवं विज्ञापन
सामान्य नियम एवं अनुशासन संबंधी सूचनाएँ:
1. "कृपया शांति बनाए रखें।"
2."मोबाइल फोन को साइलेंट मोड पर रखें।"
3."मरीजों से मिलने का समय: प्रातः 10:00 से 11:00 और सायं 5:00 से 7:00
बजे तक।"
4."एक मरीज के साथ केवल एक ही तीमारदार (Attendant)
अंदर जा सकता है।"
स्वच्छता एवं सुरक्षा संबंधी निर्देश:
1. "अस्पताल परिसर में धूम्रपान, तंबाकू या थूकना सख्त मना है।"
2."प्रवेश करने से पहले और बाद में हाथों को सैनिटाइज़ करें / साबुन से धोएँ।"
3."कूड़ा केवल कूड़ेदान में ही डालें (गीला, सूखा और मेडिकल कचरा अलग-अलग)।"
प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी
जानकारी:
1. आपातकालीन कक्ष (ICU, Casualty), ओपीडी (OPD), रक्त बैंक और दवाखाना दर्शाने वाले दिशा-सूचक बोर्ड।
2.डॉक्टरों की उपस्थिति, विशेषज्ञता और ओपीडी के समय की दैनिक सूची।
3.आयुष्मान भारत तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की पात्रता और सहायता केंद्र (Help Desk) की जानकारी।
जन-स्वास्थ्य एवं जागरूकता विज्ञापन:
1. टीकाकरण चार्ट (शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक टीके)।
2. रक्तदान और अंगदान के महत्व को दर्शाने वाले प्रेरक पोस्टर।
3. संक्रामक बीमारियों (जैसे डेंगू, मलेरिया, टीबी) के लक्षण और उनसे बचाव के उपाय।
Class 10 Hindi chapter 3 Vah re Hamdard swadhyay | Vah re Hamdard class 10 question answers
लेखनीय
'रक्त बैंक' के कार्य तथा रक्तदान कार्यक्रम के बारे
में जानकारी इकट्ठा करके अपनी कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
रक्त बैंक
एक ऐसा केंद्र है जहाँ आपातकालीन परिस्थितियों, शल्य चिकित्सा और गंभीर बीमारियों के
लिए रक्त एकत्र, परीक्षित और सुरक्षित रखा जाता है। इसके
प्रमुख कार्यों में स्वैच्छिक दाताओं से रक्त का संकलन, रक्त
समूह की पहचान तथा एचआईवी व हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की गहन जाँच शामिल है।
आधुनिक तकनीकों द्वारा यहाँ रक्त को उसके घटकों—आरबीसी (RBC), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में अलग कर उचित तापमान पर भंडारित किया जाता है।
रक्तदान
कार्यक्रम समाज में रक्त की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगाए जाने वाले
विशेष शिविर होते हैं। ये शिविर विद्यालयों, अस्पतालों और सामाजिक संस्थाओं के
सहयोग से आयोजित होते हैं। इनमें 18 से 65 वर्ष के स्वस्थ व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर सुरक्षित तरीके से
रक्तदान कराया जाता है। यह कार्यक्रम लोगों के मन से कमजोरी का भ्रम दूर कर उन्हें
जीवन रक्षक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। रक्तदान वास्तव में मानवता की सबसे बड़ी
सेवा है।
संभाषणीय
किसी
सार्वजनिक या ग्राम पंचायत की सभा में 'अंगदान' के बारे में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
आदरणीय
सरपंच महोदय, ग्राम पंचायत के सम्मानित सदस्यगण और मेरे प्यारे
ग्रामवासियों! आज इस ग्राम सभा में मुझे एक ऐसे विषय पर अपनी बात रखने का अवसर
मिला है, जो किसी के जीवन को नई रोशनी दे सकता है। वह विषय
है—'अंगदान'।
प्रायः
हमारे समाज में अंगदान को लेकर कई भ्रांतियाँ और अंधविश्वास फैले हुए हैं। कुछ लोग
सोचते हैं कि मृत्यु के बाद शरीर को जैसा है वैसा ही विलीन होना चाहिए। किंतु ज़रा
सोचिए,
हमारे जाने के बाद यह नश्वर देह या तो अग्नि में जलकर राख हो जाती
है या मिट्टी में मिल जाती है। यदि उसी शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद को नया जीवन
दे सके, तो इससे बड़ा पुण्य और मानवता की सेवा क्या हो सकती
है?
आज
हमारे देश में हर साल लाखों लोग केवल इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें समय
पर किडनी,
लिवर, हृदय या फेफड़े नहीं मिल पाते। कॉर्निया
(नेत्र) दान करने से दो नेत्रहीन व्यक्ति दुनिया की सुंदरता देख सकते हैं। एक 'ब्रेन डेड' व्यक्ति द्वारा किए गए अंगदान से लगभग आठ
लोगों को नया जीवन और कई अन्य को बेहतर स्वास्थ्य मिल सकता है।
हमारे
धार्मिक ग्रंथों में भी महर्षि दधीचि का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने मानवता की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों का दान कर दिया था।
अंगदान उसी त्याग और परोपकार की परंपरा का आधुनिक रूप है।
आइए, हम सब मिलकर अपनी ग्राम पंचायत से यह पहल करें। अंधविश्वासों को तोड़ें,
ग्रामीणों को इसके वैज्ञानिक और मानवीय पहलू से अवगत कराएँ तथा अधिक
से अधिक लोगों को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करें। हमारे जाने के बाद
भी हमारी आँखों से कोई इस सुंदर संसार को देख सके, इससे बड़ा
उपहार भला क्या होगा?
धन्यवाद।
जय हिंद!
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-
(१) संजाल पूर्ण कीजिए :
(२) अंतर स्पष्ट कीजिए :
|
प्राइवेट अस्पताल |
सार्वजनिक अस्पताल |
|
१. अच्छी सुविधाएँ होती हैं। |
१. कई बार सुविधाओं का अभाव होता है। |
|
प्राइवेट वार्ड |
जनरल वार्ड |
|
१. मिलने का कोई निश्चित समय
नहीं होता। |
१. मिलने का निश्चित समय होता
है। |
(३) आकृति में लिखिए :
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(४) कारण लिखिए :
१.
लेखक को अधिक गुस्सा अपनी पत्नी पर आया
उत्तर: आगंतुक को रोते देखकर लेखक की पत्नी ने उसे कोई
रिश्तेदार या करीबी मित्र समझकर टैक्सीवाले को किराये के पैसे दे दिए थे।
२.
लेखक कहते हैं कि मेरी दूसरी टाँग उस जगह तोड़ना जहाँ कोई परिचित न हो
उत्तर : उस जगह लेखक के परिचित होंगे तो लेखक से समय-असमय
मिलने आकर तंग करेंगे।
(५) शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :
१. वह
स्थान जहाँ अनेक प्रकार के पशु-पक्षी रखे जाते हैं-
उत्तर : चिड़ियाघर
२.
जहाँ मुफ्त में भोजन मिलता है —
उत्तर
: लंगर (भंडारा)
(६) शब्द बनाइए :
उत्तर
:
बेदर्द
(उपसर्गयुक्त)
दर्दनाक
(प्रत्यययुक्त)
उत्तर
:
अनिश्चित
(उपसर्गयुक्त)
निश्चितता
(प्रत्यययुक्त)
अभिव्यक्ति
मरीज
से मिलने जाते समय कौन-कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए, लिखिए।
उत्तर:
मरीज से मिलने जाते समय निम्नलिखित मुख्य सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
· समय
और संख्या का ध्यान: अस्पताल द्वारा तय मिलने के समय पर ही
जाएँ और एक साथ भीड़ लगाकर जाने के बजाय एक या दो लोग ही जाएँ।
· शांति
बनाए रखें: मरीज के पास या गलियारे में धीमी आवाज़ में बात करें
और अपना मोबाइल फोन साइलेंट मोड पर रखें।
· संक्रमण
से बचाव: कक्ष में प्रवेश करने से पहले हाथों को सैनिटाइज़
करें। यदि आप स्वयं अस्वस्थ हैं, तो मिलने न जाएँ। छोटे
बच्चों को भी साथ ले जाने से बचें।
· बाहरी
खाद्य पदार्थ न ले जाएँ: डॉक्टर की अनुमति के बिना मरीज के लिए
बाहर का खाना, फल या मिठाई न ले जाएँ।
· सकारात्मक
बातें करें: मरीज के सामने बीमारी की गंभीरता या नकारात्मक चर्चा
न करें, बल्कि उसका मनोबल बढ़ाएँ।
· दूरी बनाए रखें: मरीज के बिस्तर पर न बैठें और अस्पताल के चिकित्सीय उपकरणों को हाथ न लगाएँ।
भाषा
बिंदु
(१) निम्नलिखित वाक्यों में आए हुए संज्ञा शब्दों को रेखांकित करके उनके
भेद लिखिए :
१.
सोनाबाई अपने चार बच्चों के साथ आई।
उत्तर: सोनाबाई (व्यक्तिवाचक), बच्चों (जातिवाचक)
२.
गाय बहुत दूध देती है।
उत्तर: गाय (जातिवाचक), दूध (द्रव्यवाचक)
३.
मैं रोज ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।
उत्तर: ईश्वर (जातिवाचक), प्रार्थना (भाववाचक)
४.
सैनिकों की टुकड़ी आगे बढ़ी।
उत्तर: सैनिकों (जातिवाचक), टुकड़ी (समूहवाचक)
५.
सोना-चाँदी और भी महँगे होते जा रहे हैं।
उत्तर: सोना-चाँदी (द्रव्यवाचक)
६.
गोवा देख मैं तरंगायित हो उठा।
उत्तर: गोवा (व्यक्तिवाचक)
७.
युवकों का दल बचाव कार्य में लगा था।
उत्तर: युवकों (जातिवाचक), दल (समूहवाचक), कार्य (भाववाचक)
८.आपने
विदेश में भ्रमण तो कर लिया है।
उत्तर: विदेश (जातिवाचक), भ्रमण (भाववाचक)
९. इस
कहानी में भारतीय समाज का चित्रण मिलता है।
उत्तर: कहानी (जातिवाचक), समाज (समूहवाचक), चित्रण (भाववाचक)
१०.
सागर का जल खारा होता है।
उत्तर:
सागर (जातिवाचक), जल (द्रव्यवाचक)
(२) पाठ में प्रयुक्त किन्हीं पाँच संज्ञाओं को ढूँढ़कर उनका वाक्यों में
प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
१. आँख
— हमारी आँख हमें सबसे ज्यादा ज्ञान देती है।
२. अस्पताल
— मरीज अस्पताल में इलाज करवाते हैं।
3. टाँग
— गिरने की वजह से मेरी एक टाँग टूट गई।
४. सोनाबाई
— सोनाबाई हमारी पड़ोसन है।
५. शहर
— हमारा शहर बहुत बड़ा है।
(३) निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों में उचित सर्वनामों का प्रयोग
कीजिए :
१.
------- सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं।
उत्तर:
वे सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में हैं।
२.
------- बाजार जाओ।
उत्तर:
तुम बाज़ार जाओ।
३.
------- कारखाने में एक ही विभाग में काम करते थे।
उत्तर:
हम कारखाने में एक ही विभाग में काम करते थे।
४.
इसे लेकर ------- क्या करोगे ?
उत्तर:
इसे लेकर तुम क्या करोगे?
५.
हृदय ------- है; ------- उदार हो।
उत्तर:
हृदय वही है; तुम उदार हो।
६.
लोग ------- कमरा स्वच्छ कर रहे हैं।
उत्तर:
लोग स्वयं कमरा स्वच्छ कर रहे हैं।
७.
------- रिसॉर्ट हमने पहले से बुक कर लिया है।
उत्तर:
वह रिसॉर्ट हमने पहले से बुक कर लिया है।
८.
इसके बाद ------- लोग दिन भर पणजी देखते रहे।
उत्तर:
इसके बाद हम लोग दिन भर पणजी देखते रहे।
९.
------- इसके पहले उसे मना करता।
उत्तर:
मैं इसके पहले उसे मना करता!
१०.
काम करने के लिए कहा है ------- करो।
उत्तर:
काम करने के लिए कहा है वही करो।
(४) पाठ में प्रयुक्त सर्वनाम ढूँढ़कर उनका स्वतंत्र
वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
- मैंने — मैंने किताब दिया।
- तुझे — तुझे क्या हुआ?
- वे — वे गाँव गये।
- कोई — अंदर कोई था।
- आप — आप क्या करोगे?
- मुझसे — मुझसे बात न कर!
- उन्होंने — उन्होंने खाना खाया।
- मुझे — मुझे भूख लगी।
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उपयोजित
लेखन
निम्नलिखित
मुद्दों के आधार पर किसी समारोह का वृत्तांत लेखन कीजिए:
·
स्थान
·
तिथि और समय
·
प्रमुख अतिथि
·
समारोह
·
अतिथि संदेश
·
समापन
उत्तर:
वृत्तांत
लेखन: वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह
आदर्श नगर, १६
अक्टूबर २०२६:
सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में १५
अक्टूबर २०२६ को प्रातः १०:०० बजे 'वार्षिक पारितोषिक
वितरण समारोह' अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध
शिक्षाविद् डॉ. अशोक शर्मा थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि और प्रधानाचार्य
महोदय द्वारा दीप प्रज्वलन तथा छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके
बाद प्रधानाचार्य जी ने विद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और
छात्रों ने सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
तत्पश्चात मुख्य अतिथि ने शैक्षणिक, खेल
और अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को पदक
एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ. शर्मा ने कहा कि
कठिन परिश्रम और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन
में नैतिक मूल्यों और सेवा भाव को अपनाने का संदेश दिया।
उप-प्रधानाचार्य के धन्यवाद ज्ञापन और
राष्ट्रगान के साथ दोपहर १:०० बजे यह गरिमामय समारोह संपन्न हुआ।
*****






