Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions | Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 8
विद्यालय के
काव्यपाठ कार्यक्रम में सहभागी होकर कविता प्रस्तुत कीजिए:-
कृति के लिए
आवश्यक सोपान :
• काव्यपाठ का
आयोजन करवाएँ।
• विषय
निर्धारित करें।
•
विद्यार्थियों को
निश्चित विषय
पर काव्यपाठ प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करें।
उत्तर:
शिक्षक की शिक्षा से जुड़ी,
एक प्यारी कविता है यह कहानी।
कविता की धारा में बहो,
मिले सबको शिक्षा का सारा।
शिक्षक के शब्दों की छाया,
छूने को मिले नया आसमान।
शब्दों का जादू है इसमें,
ज्ञान की बौछार है इसमें।
अलंकारों से सजीव हो जाए,
भाषा का सौंदर्य छू लो सब।
एक साथ होकर पढ़ो सब,
ज्ञान का अद्भुत सफर हो सबका।
विद्या की गंगा में हो लहराए,
बच्चों के हृदय को छू लो सब।
ओ विद्यालय के साथी,
कविता में लिपटो और सहभागी हो जाओ।
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हिंदी-मराठी भाषा के
प्रमुख गज़लकारों की गज़ल रचना सुनिए और सुनाइए।
उत्तर:
हिंदी के प्रमुख गजलकार और रचनाएँ :
·
दुष्यंत कुमार: 'हो गई है पीर पर्वत सी', 'तू किसी रेल सी गुजरती है।
·
चंद्रसेन विराट: 'उड़ान'।
·
रामदरश मिश्र: 'बनाया है मैंने यह घर धीरे-धीरे।
·
जगजीत सिंह: (गायक) विभिन्न शायरों की गजलों को अपनी
आवाज़ दी, जैसे 'होठों से छू लो तुम'।
मराठी के प्रमुख गजलकार और रचनाएँ:
मंगेश पडगांवकर: मराठी गजलों के प्रमुख नाम, उनके गजल संग्रह मिलते हैं।
·
ओमप्रकाश धोरे : 'चंदूरबाजार गजल'।
·
क्रांति साडेकर: 'ग़ज़ल समा साहे।
·
डॉ. श्रीकृष्ण राउत: 'गुलाल और अन्य ग़ज़लें।
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‘दहेज’ जैसी सामाजिक समस्याओं को समझते हुए इसके संदर्भ में
जन जागृति करने हेतु घोषवाक्यों का वाचन कीजिए।
उत्तर:
·
बेटी कोई वस्तु नहीं, दहेज से जो बिक रही।
·
शादी तो एक बहाना है, दहेज लेकर आना है।
·
अनमोल से भी अनमोल है बेटी, फिर उसे दहेज से
क्यों बेची।
·
दहेज प्रथा ने जुल्म किया, बेटी को बोझ बना
दिया।
·
जब तक रहेगी दहेज प्रथा, बेटी रहेगी दुखी
सदा।
‘मैं चिड़िया बोल रही हूँ’ इस विषय पर स्वप्रेरणा से लेखन कीजिए।
उत्तर:
मैं चिड़िया बोल रही हूँ
मैं एक छोटी-सी चिड़िया हूँ। मैं
खुले आकाश में उड़ना और पेड़ों की डालियों पर बैठकर चहचहाना बहुत पसंद करती हूँ।
सुबह होते ही मैं अपने मीठे स्वर से प्रकृति को मधुर बना देती हूँ। मेरी चहचहाहट
से वातावरण में आनंद और ताजगी फैल जाती है।
मेरा घर पेड़ों की शाखाओं पर बना
एक छोटा-सा घोंसला है। मैं तिनके और सूखी घास से अपना घोंसला बनाती हूँ। वहीं मैं
अपने बच्चों के साथ रहती हूँ। मैं अपने बच्चों के लिए दाने और पानी ढूँढ़कर लाती
हूँ और उनकी देखभाल करती हूँ।
लेकिन आजकल मेरा जीवन पहले जैसा
आसान नहीं रहा है। लोग पेड़ों को काटते जा रहे हैं, जिससे हमें रहने के लिए जगह नहीं
मिलती। शहरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण भी हमें बहुत कठिनाइयों का सामना करना
पड़ता है। कई बार हमें खाने के लिए दाने भी मुश्किल से मिलते हैं।
मैं मनुष्यों से बस इतनी-सी विनती
करना चाहती हूँ कि वे पेड़ों को बचाएँ और हमारे लिए भी इस धरती पर रहने की जगह
छोड़ें। यदि पेड़ रहेंगे, तो हम चिड़ियाँ भी खुश रहेंगी और प्रकृति भी सुंदर बनी
रहेगी।
इसलिए कृपया प्रकृति की रक्षा
कीजिए, ताकि हम चिड़ियाँ हमेशा खुले आकाश में खुशी से उड़ सकें।
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अंतरजाल की सहायता लेकर कोई कविता पढ़िए और निम्न मुद्दों के आधार पर आशय स्पष्ट कीजिए :-
1. कवि का
नाम
2. कविता का
विषय
3. केंद्रीय
भाव
4. कविता का
संदेश
उत्तर:
कविता- स्वर्ग बना सकते हैं
कवि का नाम -
स्वर्ग बना सकते है कविता रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी है। रामधारी सिंह
दिनकर एक हिंदी कवि, निबंधकार थे। रामधारी सिंह दिनकर एक देशभक्त और विद्वान
इंसान थे। भारतीय स्वतंत्रता अभियान के समय में उन्होंने अपनी कविताओ से ही जंग
छेड़ दी थी। वह लोगों को देश के प्रति जागरूक करते थे।
कविता का विषय -
कविता 'स्वर्ग बना सकते हैं में कवि ने इस कविता में अपने देश की तुलना
स्वर्ग से की है। हम चाहे तो धरती को स्वर्ग बना सकते है। धरती सब की है। हम सब
मिलकर रह सकते है। सब बेकार की चीजों को छोड़कर हम सुख का जीवन भोग सकते है।
केंद्रीय भाव -
इस कविता का केन्द्रीय भाव यह है की, कवि ने अपने देश की तुलना स्वर्ग से
की है।
कविता का संदेश
कविता की पंक्तियाँ हमें यह संदेश
देना चाहती है की भगवान ने हम सभी को जन्म दिया और भगवान ने हम सब को एक तरह से
बनाया है। साथ ही इस धरती, वायु, प्रकाश, पेड़-पौधों
आदि का उपयोग करने का हमें मौक दिया है। हमें इन सब का प्रयोग अच्छे से करना चाहिए
और इस का गलत उपयोग नहीं करना चाहिए। हमें अपने देश की रक्षा करनी चाहिए, हमारा देश एक स्वर्ग है। हमें किसी भी चीज़ को नष्ट नहीं करना चाहिए।
std 9 hindi chapter 8 Udan question answer | उड़ान स्वाध्याय इयत्ता नववी
(१) सूचना के अनुसार कृति पूर्ण कीजिए :-
सही विकल्प चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए :
(क) परों में शक्ति हो तो ....................
·
उपलब्ध नभ को नापना है।
·
उपलब्ध जल को नापना है।
·
भू को नापना है।
उत्तर:
परों में शक्ति हो तो उपलब्ध नभ
को नापना है।
(ख) सुलगते आप, बाहर से
....................
तपन नहीं माँगा करते।
अगन नहीं माँगा करते।
बुझन नहीं माँगा करते।
उत्तर:
सुलगते आप, बाहर से अगन नहीं माँगा करते।
(४) संजाल :- कवि ने इन मानवीय गुणों की ओर संकेत किया है
(२) निम्नलिखित काव्य पंक्तियों का सरल भावार्थ लिखिए :-
अँधेरे के इलाके में ........ नमन माँगा नहीं करते।
उत्तर:
प्रस्तुत गजल में कवि कहते हैं, "इंसान के पास स्वाभिमान का
होना बेहद जरूरी होता है। उसे अँधेरे के इलाके में किरण नहीं माँगनी चाहिए। यानी जब
संकट की स्थिति आ जाएँ, तब इंसान को स्वयं ही उसके साथ
संघर्ष करना चाहिए। किसी से मदद नहीं मांगनी चाहिए। जहाँ पर कंटकों का यानी काँटों
का बन होता है; वहाँ पर काँटों के सिवा कुछ नहीं होता है। वहाँ
पर सुमन नहीं हो सकते हैं। अर्थात संकट की परिस्थितियों में सर्वत्र काँट-ही-काँटे
होते हैं। वहाँ पर दुख-दर्द व पीड़ा ही होती है। वहाँ पर हम सुख की अपेक्षा नहीं क
सकते। "जो व्यक्ति सचमुच आदर का अधिकारी है उसके सामने दुसरे लोगों के मस्तक
अपने आप झुक जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को किसी से नमन या आदर मांगने की जरूरत नहीं
होती बल्कि उसे तो अपने आप आदर मिल जाता है। व्यक्ति के पास विनम्रता होनी
चाहिए।"
(३) कविता द्वारा दिया गया संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
कविता में परोपकार, आत्मनिर्भरता, विनम्रता, स्वाभिमान, मेहनत जैसे कई मानवीय गुणों के बारे में
बताया गया है। कवि के अनुसार इंसान को विनम्र व आत्मनिर्भर होना चाहिए। जीवन
संघर्षों से भरा हो फिर भी हार नहीं माननी चाहिए। अपनी मंजिल को प्राप्त करने के
लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। जरूरत के समय एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।
(४) कविता में
प्रयुक्त विरामचिह्नों के नाम लिखकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
१. अल्प विराम (,)
वाक्य : महेश, गणेश, मनोज और करीना घूमने के लिए
आगरा गए।
२. पूर्ण विराम (1)
वाक्य : स्वतंत्रता हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार है।
३. योजक चिह्न (-)
वाक्य: पुत्र के लिए माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
Lokbharti Chapter 8 उड़ान Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.
उत्तर:
इस रचना में चंद्रसेन विराट जी ने स्वाभिमान, विनम्रता, हौसला, बुलंदी, दूरदृष्टि जैसे अनेक मानवीय गुणों को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है।
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