Class 9 Hindi Chapter 2 Jangal Question Answer | जंगल ९वी हिंदी स्वाध्याय

जंगल Questions And Answers Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 1 Jangal Textbook Questions and Answers
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Std 9 hindi chapter 2 Jangal swadhyay  | 9th Digest Chapter 2

Std 9 hindi chapter 2 Jangal swadhyay  | 9th Digest Chapter 2
पूरक पठन

'जंगल में रहने वाले पक्षियों के मनोगत' इस विषय पर कक्षा में चर्चा का आयोजन कीजिए :-

कृति के लिए आवश्यक सोपान :

पिंजड़े में कौन से पक्षी रखे जाते है; पूछें।

• पक्षियों की बोलियों की जानकारी लें।

पक्षी एक-दूसरे से और विद्यार्थी से पक्षियों के संवादों का नाट्यीकरण करवाएँ।

उत्तर:

कक्षा में जंगल में रहने वाले पक्षियों के मनोगत विषय पर एक रोचक आयोजन किया गया। शुरुआत में विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि पिंजरे में सामान्यतः किन-किन पक्षियों को रखा जाता है, जैसे तोता, मोर, कबूतर, बुलबुल और चिड़िया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न पक्षियों की बोलियों तथा उनके स्वर-संकेतों के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्रों ने ध्यान दिया कि प्रत्येक पक्षी की आवाज़ अलग होती है—तोता चहचहाता है, बुलबुल मधुर स्वर में गान करती है और मोर अपने पंख फैलाकर विशेष ध्वनि निकालता है।

इसके पश्चात कक्षा में पक्षियों और विद्यार्थियों के बीच संवाद का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने पक्षियों की भूमिका निभाते हुए आपस में प्रश्न किए, जैसे—भोजन कहाँ मिलेगा?, हम किस दिशा में उड़ें? और क्या हमारा घोंसला सुरक्षित है? इस प्रस्तुति के माध्यम से छात्रों ने पक्षियों की भावनाओं, उनके संघर्षों और जीवन-परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया।

इस गतिविधि से बच्चों को यह अनुभव हुआ कि जंगल में रहने वाले पक्षी केवल अपनी आवाज़ से ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, रंग-रूप और गतिविधियों के माध्यम से भी अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं।

      अंत में चर्चा में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जंगल में रहने वाले पक्षी न केवल प्रकृति को सुंदर बनाते हैं, बल्कि जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी देखभाल करना और उनके जीवन को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। इस गतिविधि से छात्रों ने न केवल पक्षियों के मनोगत को समझा, बल्कि उनके व्यवहार और जंगल के महत्व को भी अनुभव किया।

 

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संभाषणीय

'जंगल के राजा का मनोगत' इस विषय पर कक्षा में चर्चा का आयोजन कीजिए।

उत्तर:

मैं शेर हूँ, और मुझे जंगल का राजा कहा जाता है। मेरी शक्तिशाली दहाड़ कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है, जिससे आसपास के सभी पशु-पक्षी सतर्क और भयभीत हो जाते हैं। मैं मांसाहारी प्राणी हूँ और घने जंगलों में निवास करता हूँ। मेरी दौड़ने की गति लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। पहले जब जंगल अधिक थे, तब हमारी संख्या भी ज्यादा थी, लेकिन आज वनों की कटाई के कारण मेरी प्रजाति धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

मैं अपने परिवार के साथ जंगल में रहता हूँ। मेरी संगिनी शेरनी है और हमारे दो शावक हैं। शिकार करने की मुख्य जिम्मेदारी शेरनी निभाती है, जबकि मैं अपने समूह की रक्षा करता हूँ। मैं प्रायः रात में सक्रिय रहता हूँ और दिन में विश्राम करता हूँ। मनुष्य मुझसे डरता भी है, परंतु कभी-कभी वह मुझे जाल में फँसाकर अपने स्वार्थ के लिए जंगल से दूर ले जाता है। कुछ स्थानों पर हमारे जैसे शेरों को पकड़कर प्रशिक्षण दिया जाता है और मनोरंजन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

 

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मौलिक सृजन

'जंगल ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले स्रोत हैं' इस विषय पर अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:

जंगल हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे पृथ्वी के फेफड़े कहलाते हैं क्योंकि पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यही ऑक्सीजन सभी जीव-जंतुओं और मनुष्यों के श्वसन के लिए आवश्यक है। यदि जंगल न हों, तो वातावरण में संतुलन बिगड़ जाएगा और जीवित रहना कठिन हो जाएगा।

जंगल केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि वर्षा लाने, जलवायु को संतुलित रखने और मिट्टी को उपजाऊ बनाने में भी सहायक होते हैं। वे अनेक पशु-पक्षियों का घर हैं और जैव विविधता को बनाए रखते हैं। आज तेजी से हो रही वनों की कटाई के कारण पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और जंगलों की रक्षा करनी चाहिए। यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी।

पठनीय

जंगलों से प्राप्त होने वाले संसाधनों की जानकारी का वाचन कीजिए।

जंगलों से प्राप्त होने वाले संसाधन (बिंदुवार)

 

लकड़ी – घर बनाने, फर्नीचर तैयार करने, कागज और ईंधन के रूप में उपयोग।

उत्तर:

Ø  औषधीय जड़ी-बूटियाँ – दवाइयाँ बनाने में उपयोग; आयुर्वेद में विशेष महत्व।

Ø  फल और फूल – भोजन, सुगंध और सजावट के लिए उपयोगी।

Ø  शहद – मधुमक्खियों से प्राप्त; पोषक और औषधीय गुणों से भरपूर।

Ø  गोंद और राल – दवाइयों, रंग और उद्योगों में उपयोग।

Ø  लाख – चूड़ी, वार्निश और सजावटी वस्तुएँ बनाने में उपयोग।

Ø  रबर – टायर, जूते और अन्य वस्तुएँ बनाने में काम आता है।

Ø  बाँस – टोकरी, फर्नीचर, कागज और हस्तशिल्प बनाने में उपयोग।

Ø  ईंधन – लकड़ी और सूखी टहनियाँ जलाने के लिए उपयोगी।

Ø  वन्य उत्पाद – मसाले, जड़ी-बूटियाँ और अन्य प्राकृतिक पदार्थ।

Ø  पर्यावरणीय लाभ – ऑक्सीजन प्रदान करना, वर्षा लाना, मिट्टी कटाव रोकना और जलवायु संतुलन बनाए रखना।

Ø  इस प्रकार जंगल हमें अनेक प्रकार के प्राकृतिक और आर्थिक संसाधन प्रदान करते हैं, इसलिए उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है|

 


Textbook Exercise Important Questions and Answers. | Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 2

लेखनीय




महाराष्ट्र के प्रमुख अभयारण्यों की जानकारी निम्न मुद्दों के आधार पर लिखिए :


उत्तर:


नाम

स्थान

विशेषताएँ

ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प

चंद्रपुर जिला

महाराष्ट्र का सबसे पुराना और प्रसिद्ध अभयारण्य; बाघों के लिए प्रसिद्ध; घना जंगल और झीलें।

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान

मुंबई

शहर के बीच स्थित; कान्हेरी गुफाएँ; तेंदुए और विभिन्न पक्षियों का निवास।

भिमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य

पुणे जिला

पश्चिमी घाट में स्थित; दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरी (शेकरू) के लिए प्रसिद्ध।

नवेगांव-नागझिरा अभयारण्य

गोंदिया जिला

सुंदर झीलें; बाघ, तेंदुआ और अनेक पक्षी प्रजातियाँ।

राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य

कोल्हापुर जिला

भारतीय गौर (बायसन) के लिए प्रसिद्ध; घना वन क्षेत्र।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प

अमरावती जिला

सतपुड़ा पर्वतमाला में स्थित; बाघ और विविध वन्यजीवों का संरक्षण क्षेत्र।

 

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आसपास

अपने गाँव/शहर के वन विभाग अधिकारी से उनके कार्यसंबंधी जानकारी प्राप्त कीजिए।

उत्तर:

वन विभाग अधिकारी के कार्य

1.  जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण करना।

2.  अवैध पेड़ कटाई को रोकना।

3.  शिकार और वन्य जीवों की तस्करी पर नियंत्रण रखना।

4.  वन क्षेत्र में नियमित गश्त करना।

5.  वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करना।

6.  जंगल में आग लगने से बचाव और नियंत्रण करना।

7.  घायल या बीमार वन्य प्राणियों का उपचार करवाना।

8.  पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागृति करना।

9.  वन्य जीवों और जैव विविधता की रक्षा करना।

10.              वन संबंधी कानूनों का पालन सुनिश्चित करना।

श्रवणीय



'मानो सूखा वृक्ष बोल रहा है', उसकी बातें निम्न मुद्दो के आधार पर ध्यान से सुनिए :

बीज

बचपन

ऋतुओं का परिणाम

मन की इच्छा

उत्तर:

मैं एक सूखा वृक्ष हूँ। आज भले ही मेरी डालियाँ बेजान दिखाई देती हैं, पर कभी मैं भी एक छोटा-सा बीज था। उस बीज को किसी किसान ने प्रेम से मिट्टी में बोया था। धरती माँ की गोद में रहकर मैंने अंकुर फोड़ा और धीरे-धीरे बाहर आया। सूरज की किरणों और वर्षा के जल ने मुझे बढ़ने की शक्ति दी।

मेरा बचपन बहुत सुंदर था। मैं एक नन्हा पौधा था, जिसकी कोमल पत्तियाँ हवा के साथ झूमती थीं। बच्चे मेरी छाया में खेलते थे और पक्षी मेरी डालियों पर बैठकर मधुर गीत गाते थे। मैं सबको शुद्ध हवा देता था और अपने आसपास हरियाली फैलाता था।

ऋतुओं का मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ता था। वसंत में मैं हरे-भरे पत्तों से भर जाता, गर्मी में राहगीरों को छाया देता, वर्षा में ताजगी से भर उठता और शरद में मेरे पत्ते झड़ जाते। समय के साथ अनेक तूफान और आंधियाँ आईं। धीरे-धीरे मेरी शक्ति कम होती गई और आज मैं सूखा खड़ा हूँ।

मेरे मन की इच्छा है कि लोग मेरी कहानी से सीख लें। पेड़ों की कटाई न करें और अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ। यदि नए बीज बोए जाएँगे, तो फिर से हरियाली लौटेगी। मैं चाहता हूँ कि आने वाली पीढ़ियाँ हरे-भरे जंगल देखें और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लें।

 

पाठ के आँगन में

(१) सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए :-

 

(क) प्रवाह तालिका : कहानी के पात्र तथा उनके स्वभाव की विशेषताएँ :-


उत्तर:



(ख) पहचानिए रिश्ते :

उत्तर:

(१) दादी - तविषा - सास-बहू

(२) पीयूष - शैलेश - पुत्र- पिता

(३) तविषा - शैलेश - पत्नी- पति

(४) शैलेश - दादी - पुत्र- माता

 

पाठ से आगे

पालतू प्राणियों के लिए आप क्या करते हैं, विस्तार पूर्वक लिखिए।

उत्तर:

पालतू प्राणी हमारे सच्चे मित्र होते हैं। वे हमें प्रेम, स्नेह और सुरक्षा देते हैं। इसलिए उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है। मैं अपने पालतू प्राणियों के लिए कई बातें ध्यान में रखता हूँ।

सबसे पहले, मैं उन्हें समय पर भोजन और स्वच्छ पानी देता हूँ। उनके भोजन का विशेष ध्यान रखता हूँ ताकि उन्हें पौष्टिक आहार मिले और वे स्वस्थ रहें। मैं उनके रहने की जगह को साफ-सुथरा रखता हूँ, ताकि उन्हें किसी प्रकार की बीमारी न हो।

मैं उनके स्वास्थ्य की भी चिंता करता हूँ। समय-समय पर उन्हें पशु-चिकित्सक के पास ले जाता हूँ और आवश्यक टीकाकरण करवाता हूँ। यदि वे बीमार पड़ते हैं, तो तुरंत इलाज करवाता हूँ।

इसके अलावा, मैं उनके साथ खेलता हूँ और उन्हें घुमाने ले जाता हूँ। इससे वे खुश रहते हैं और उनका मन भी प्रसन्न रहता है। मैं उन्हें कभी मारता-डाँटता नहीं, बल्कि प्यार से समझाता हूँ।

मुझे लगता है कि पालतू प्राणियों की सेवा करना एक अच्छा और जिम्मेदार कार्य है। हमें हमेशा उनके प्रति दया और करुणा का भाव रखना चाहिए, क्योंकि वे भी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं और प्रेम के हकदार हैं।

 

 

२) पत्र लेखन :-


गरमी की छुट्टियों में महानगरपालिका/नगर परिषद/ग्राम पंचायतों द्वारा पक्षियों के लिए बनाए घोंसले तथा चुग्गा- दाना-पानी की व्यवस्था किए जाने के कारण संबंधित विभाग की प्रशंसा करते हुए पत्र लिखिए।

उत्तर:

5 मार्च, 2026
सेवा में,
महानगरपालिका,
माननीय उद्यान विभाग अधिकारी,
नाशिक  440010

विषय : सार्वजनिक उद्यानों में स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान हेतु प्रशंसा पत्र

महोदय,

मैं इस पत्र के माध्यम से आपके विभाग द्वारा शहर के सार्वजनिक उद्यानों में स्वच्छता बनाए रखने तथा वृक्षारोपण अभियान सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए हृदय से प्रशंसा व्यक्त करना चाहता हूँ। आपके कर्मचारियों ने नियमित रूप से उद्यानों की सफाई कर, कचरा हटाकर तथा नए पौधे लगाकर वातावरण को स्वच्छ और हरित बनाने का सराहनीय कार्य किया है।

विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था तथा पौधों की देखभाल की गई है, जिससे नागरिकों को स्वच्छ और सुंदर वातावरण प्राप्त हो रहा है। आपके इस प्रयास से लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

आपके विभाग का यह कार्य समाज के लिए प्रेरणादायक है। आशा है कि भविष्य में भी ऐसे ही जनहितकारी कार्य निरंतर चलते रहेंगे।

धन्यवाद।

आपका विश्वासी,
चैतन्य कांबळे.
नाशिक  440010

 

३) कहानी लेखन :-

दिए गए शब्दों की सहायता से कहानी लेखन कीजिए। उसे उचित शीर्षक देकर प्राप्त होने वाली सीख भी लिखिए :- अकाल, तालाब, जनसहायता, परिणाम

उत्तर:

एकता का तालाब

एक छोटे से गाँव में भयंकर अकाल पड़ गया। वर्षा न होने के कारण खेत सूख गए, पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए पानी की कमी हो गई। गाँव के कुएँ भी सूखने लगे। ऐसी कठिन परिस्थिति में गाँव वालों ने मिलकर समाधान खोजने का निश्चय किया।

गाँव के बुजुर्गों ने सुझाव दिया कि यदि सब मिलकर एक बड़ा तालाब बनाएँ, तो वर्षा का पानी उसमें इकट्ठा किया जा सकता है। यह कार्य अकेले किसी एक व्यक्ति के लिए संभव नहीं था, इसलिए सभी ने जनसहायता का मार्ग अपनाया। अमीर-गरीब, छोटे-बड़े सभी ने अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार श्रम और धन का योगदान दिया।

कई दिनों की मेहनत के बाद तालाब तैयार हो गया। कुछ समय बाद वर्षा हुई और तालाब पानी से भर गया। अब गाँव में पानी की समस्या दूर हो गई। खेत फिर से हरे-भरे हो गए और पशुओं को भी पर्याप्त पानी मिलने लगा।

इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि गाँव में सुख-समृद्धि लौट आई। लोगों ने समझ लिया कि एकता और सहयोग से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।

सीख : कठिन समय में धैर्य और मिल-जुलकर कार्य करने से हर समस्या का समाधान संभव है।

 


रचनाबोध

उत्तर:

मुद्रल जी ने अपनी कहानी में खरगोश के जरिए बच्चों की भावनाओं, जानवरों के प्रति उनके व्यवहार, उनके संरक्षण और सभी प्राणियों के प्रति करुणा की भावना को प्रस्तुत किया है।


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