Class 10 Hindi Lokbharati Chapter 2 Lakshmi | स्वाध्याय प्रश्न उत्तरे | SSC Board
Maharashtra state boardStd 10 Hindi digest answers
परिच्छेद पर आधारित कृतियाँ :-
'ज्ञान सिंह को मवेशी स्वीकार करोगे -----? '
परिच्छेद से प्राप्त ज्ञान सिंह संबंधी जानकारी :
- कारखाने में काम करना
- मवेशी पालने का शौक
- उदार विचारवाला
- अब नौकरी से अवकाश प्राप्त
ज्ञान सिंह की समस्या :
- नौकरी से अवकाश के बाद ज्ञान सिंह को कंपनी का
मकान खाली करना था
- लक्ष्मी को वह अपने साथ नहीं ले जा सकता था
ज्ञान सिंह के दूध बेचने का उद्देश्य :
- लक्ष्मी इतना अधिक दूध देती थी कि घर की जरूरत
पूरी हो जाने पर भी काफी दूध बच जाता था
- दूध बेचकर ज्ञान सिंह लक्ष्मी को चारा और दर्रा
आदि देने के लिए कुछ पैसे जुटा लेता था
व्याकरण - शब्द संजाल (सेवक) :
- पर्यायवाची : दास
- विलोम : स्वामी
- लिंग परिवर्तन : सेविका
- वचन परिवर्तन : सेवकों
सूचना
के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
(१)
संजाल पूर्ण कीजिए :
Class 10 Hindi chapter 2 Lakshmi swadhyay | Lakshmi class 10 question answers
(२)
उत्तर लिखिए :
१ ............ज्ञान
सिंह की समस्याएँ.................
उत्तर:
१.नौकरी से अवकाश के बाद ज्ञान सिंह को कंपनी का मकान
खाली करना था
२.लक्ष्मी को वह अपने साथ नहीं ले जा सकता था
२. ..................ज्ञान
सिंह के दूध बेचने का उद्देश्य................
उत्तर:
१.लक्ष्मी इतना अधिक दूध देती थी कि घर की जरूरत पूरी
हो जाने पर भी काफी दूध बच जाता था
२. दूध बेचकर ज्ञान सिंह लक्ष्मी को चारा और दर्रा
आदि देने के लिए कुछ पैसे जुटा लेता था
Lakshmi question answer Maharashtra state board | Std 10 Hindi Lokbharati chapter 2 digest answers
(३)
चौखट में दी सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
उत्तर:
१.पर्यायवाची : दास
२.विलोम : स्वामी
3.लिंग परिवर्तन : सेविका
४.वचन परिवर्तन : सेवकों
(४)
पालतू जानवरों के साथ किए जाने वाले सौहार्दपूर्ण व्यवहार के बारे में अपने विचार
लिखिए।
उत्तर:
पालतू
जानवर हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग होते हैं और वे केवल उपयोग की वस्तु न होकर घर
के सदस्य के समान होते हैं। वे मूक प्राणी हैं, जो बोलकर अपनी पीड़ा
या आवश्यकता व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनके प्रति
सौहार्दपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है। हमें उनके उचित
खान-पान, रहने की स्वच्छ जगह और स्वास्थ्य संबंधी देखरेख का
पूरा ध्यान रखना चाहिए। उनके साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता करने के बजाय प्रेम और
अपनत्व का व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि पशु केवल प्रेम की
भाषा समझते हैं और बदले में निष्ठा व वफादारी देते हैं। उनकी मूक भावनाओं को समझकर
उनके प्रति दयालु बने रहना ही सच्ची मानवता है।
दहावी हिंदी लक्ष्मी स्वाध्याय उत्तरे | इयत्ता दहावी हिंदी लक्ष्मी प्रश्न उत्तरे
श्रवणीय
'पर्यावरण चक्र को बनाए रखने में प्राणियों की भूमिका' के बारे में यू ट्यूब/रेडियो/ दूरदर्शन से जानकारी सुनिए।
पठनीय
भारत
सरकार द्वारा 'पशु संरक्षण' पर
चलाई जाने वाली योजनाओं की जानकारी पढ़िए और घोषवाक्य बनाकर प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
पशु संरक्षण
योजनाएँ :
·
राष्ट्रीय पशुधन मिशन : इसके तहत
पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, कल्याण और उन्नत नस्ल के लिए
वित्तीय सहायता और बीमा का लाभ दिया जाता है।
·
वन्यजीव संरक्षण परियोजनाएं : लुप्तप्राय
प्रजातियों को बचाने के लिए 'प्रोजेक्ट टाइगर' (बाघ), 'हाथी परियोजना', और 'गेंडा परियोजना' जैसी पहल शामिल हैं।
·
चारा तथा चारागाह विकास योजना : पशुओं
के पोषण और संतुलित आहार सुनिश्चित करने के लिए यह योजना चलाई जा रही है।
·
गोसदन / आश्रय गृह योजना : बेसहारा, वृद्ध और बीमार पशुओं के सुरक्षित आश्रय के लिए।
पशु
संरक्षण पर घोषवाक्य:
(१)
"पशुधन है देश की शान, इनकी रक्षा हमारा मान।"
(२) "आओ मिलकर कदम बढ़ाएं, पशु-पक्षियों का जीवन
बचाएं।"
(३) "पशुओं का संरक्षण, प्रकृति का
संतुलन।"
संभाषणीय
'विलुप्त हो रहे जानवरों' पर संक्षेप में अपने विचार
व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
ऐसे
अनेक जानवर हैं, जो या तो संख्या में कम हैं या बदलते
पर्यावरण और परभक्षण मानकों के कारण लुप्तप्राय हो रहे हैं। साथ ही वनों की कटाई
के कारण भोजन और पानी की कमी हो जाना भी इनकी आबादी कम होने का कारण है। पर्यावरण
संतुलन में इन जीवों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इन प्रजातियों में बड़ी
तेजी से गिरावट आ रही है। भारत में स्तनपायी वन्य जीवों की ८१ प्रजातियाँ
संकटग्रस्त हैं।
लेखनीय
'पेटा' (PETA) संस्था के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए
और इसके प्रमुख मुद्दे विद्यालय के भित्ति फलक पर लिखिए।
उत्तर:
विद्यालय
भित्ति फलक
'पेटा'
(PETA) संस्था का परिचय
- पूरा नाम: People for the Ethical
Treatment of Animals (पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के पक्षधर
लोग)
- स्थापना: 22 मार्च 1980
(संस्थापक: इंग्रिड न्यूकिर्क एवं एलेक्स पाचेको)
- मुख्यालय: नॉरफ़ॉक, वर्जीनिया (अमेरिका) | भारत में शाखा: पेटा
इंडिया (मुंबई)
- मूल सिद्धांत / ध्येय वाक्य: "पशु हमारे प्रयोग करने, खाने, पहनने, मनोरंजन करने या किसी अन्य प्रकार से
दुर्व्यवहार करने के लिए नहीं हैं।"
पेटा के चार प्रमुख मुद्दे एवं
कार्यक्षेत्र
1. भोजन हेतु
पशुओं पर क्रूरता रोकना (Food Industry):
o
मांस, अंडा और डेयरी उद्योग में मूक
पशु-पक्षियों पर होने वाले अत्याचारों को उजागर करना।
o
लोगों को शाकाहारी व वीगन (Vegan) जीवनशैली
अपनाने के लिए प्रेरित करना।
2. वस्त्र
एवं फैशन उद्योग में शोषण का विरोध (Clothing/Fashion):
o
चमड़ा (leather), फर, रेशम
(silk) और ऊन के लिए जानवरों के साथ की जाने वाली बर्बरता पर
रोक लगाना।
o
क्रूरता-मुक्त (Cruelty-free) और पर्यावरण-अनुकूल
विकल्पों को बढ़ावा देना।
3. प्रयोगशालाओं
में परीक्षण पर रोक (Scientific Research & Cosmetics):
o
दवाइयों, रसायनों और सौंदर्य प्रसाधनों (Cosmetics)
के परीक्षण हेतु बंदर, चूहे, खरगोश आदि पर होने वाले अमानवीय प्रयोगों को बंद कराना।
o
वैज्ञानिक परीक्षणों के गैर-पशु विकल्पों के उपयोग पर
बल देना।
4. मनोरंजन
उद्योग में पशुओं के दुरुपयोग का अंत :
o
सर्कस, मेलों, फिल्मों
और पर्यटन में जानवरों को बंधक बनाकर करतब करवाने का विरोध करना।
o
उत्सवों व मंदिरों में जीवित हाथियों के स्थान पर
यांत्रिक (Mechanical) हाथियों के प्रयोग जैसी आधुनिक तकनीकों को
बढ़ावा देना।
Std 10 Hindi Lokbharati Chapter 2 Lakshmi Swadhyay & Digest Answers
स्वाध्याय
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-
(१) संजाल पूर्ण कीजिए :
उत्तर:
(३) उत्तर लिखिए :
(२) उचित घटनाक्रम लगाकर वाक्य फिर से लिखिए :
१.
उसके गले में रस्सी थी।
२.
रहमान बड़ा मूर्ख है।
३. वह
लक्ष्मी को सड़क पर ले आया।
४.
उसने तुम्हें बड़ी बेदर्दी से पीटा है।
उत्तर:
१. उसने तुम्हें बड़ी बेदर्दी से पीटा है।
२. रहमान बड़ा मूर्ख है।
३. उसके गले में रस्सी थी।
४. वह लक्ष्मी को सड़क पर ले आया।
(४) गलत वाक्य, सही करके लिखिए :
१.
करामत अली पिछले चार सालों से गाय की सेवा
करता
चला आ रहा था।
उत्तर:
करामत अली पिछले एक साल से गाय की सेवा करता चला आ रहा था।
२.
करामत अली को लक्ष्मी की पीठ पर रोगन लगाने के
बाद
इत्मीनान हुआ।
उत्तर:
करामत अली को लक्ष्मी की पीठ पर रोगन लगाने के बाद भी इत्मीनान नहीं
हुआ।
(५) निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर वर्णन कीजिए :
(६) कारण लिखिए :
१.
करामत अली लक्ष्मी के लिए सानी तैयार करने लगा।
उत्तर:
सुबह से रमजानी या रहमान किसी ने भी लक्ष्मी को चारा, दर्रा कुछ भी नहीं दिया था। लक्ष्मी बहुत भूखी थी।
२.
रमजानी ने करामत अली को रोगन दिया।
उत्तर:
रहमान के मारने के कारण लक्ष्मी की पीठ पर चोट आई थी।
३.
रहमान ने लक्ष्मी को इलाके से बाहर छोड़ दिया।
उत्तर:
रहमान ने सोचा कि लक्ष्मी नाले के पास उगी दूब खाकर पेट भर लेगी।
४.
करामत अली ने लक्ष्मी को गऊशाला में भरती किया।
उत्तर:
पैसे की तंगी के कारण करामत अली लक्ष्मी के दाने-चारे का प्रबंध नहीं कर पा रहा
था। वह लक्ष्मी को भूखों मरता नहीं देख सकता था।
(७) हिंदी-मराठी में समोच्चारित शब्दों के भिन्न अर्थ लिखिए :
जैसे:
खत
पत्र
(हिंदी)
उत्तर:
1. पीठ : शरीर का
अंग / आटा
2. खाना : भोजन /
दराज
3. चारा : उपाय /
जानवरों को खिलाने की सामग्री
4. कल : बीता हुआ
अथवा आने वाला समय / रुझान, प्रवृत्ति
अभिव्यक्ति
'यदि आप करामत अली की जगह पर होते तो' इस संदर्भ में
अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
करामत अली दोस्त को दिए गए वचन को निभाने वाला और पशु की पीड़ा समझने वाला इन्सान है। यदि करामत अली की जगह मैं होता तो मैं भी वही करता, जो करामत अली ने किया। जब हम किसी पशु को पालते हैं, तो उसकी सुख-सुविधा और खाने-पीने की उचित व्यवस्था करना हमारी जिम्मेदारी होती है। यदि मेरे समक्ष करामत अली जैसी स्थिति उत्पन्न होती, तो मैं भी अपने पालतू पशु को भूखा मरते देखने या उसे कसाई के हाथों बेचने के स्थान पर किसी अच्छे पशुघर (गऊशाला) में ही दाखिल कराता |
भाषा
बिंदु
(१) निम्नलिखित वाक्यों में उचित विरामचिह्नों का प्रयोग कर वाक्य पुनः
लिखिए :
१. ओह
कंबख्त ने कितनी बेदर्दी से पीटा है
उत्तर:
"ओह ! कंबख्त ने कितनी बेदर्दी से पीटा है।"
२.
मैंने कराहते हुए पूछा मैं कहाँ हूँ
उत्तर:
मैंने कराहते हुए पूछा - "मैं कहाँ हूँ?"
३.
मँझली भाभी मुट्ठी भर बुँदियाँ सूप में फेंककर चली गई
उत्तर: मँझली भाभी मुट्ठी भर बुँदियाँ सूप में फेंककर चली गई।
४.
बड़ी बेटी ने ससुराल से संवाद भेजा है उसकी ननद रूठी हुई है मोथी की शीतलपाटी के
लिए
उत्तर:
बड़ी बेटी ने ससुराल से संवाद भेजा है, उसकी ननद रूठी हुई है
मोथी की शीतलपाटी के लिए।
५.
केवल टीका नथुनी और बिछिया रख लिए थे
उत्तर: केवल टीका, नथुनी और बिछिया रख लिए थे।
६.
ठहरो मैं माँ से जाकर कहती हूँ इतनी बड़ी बात
उत्तर:
ठहरो, मैं माँ से जाकर कहती हूँ, इतनी
बड़ी बात !
७.
टाँग का टूटना यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना
उत्तर:'टाँग का टूटना' यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन
रहना।
८. जल्दी-जल्दी
पैर बढ़ा
उत्तर:
जल्दी-जल्दी पैर बढ़ा।
९.
लक्ष्मी चल अरे गऊशाला यहाँ से दो किलोमीटर दूर है
उत्तर:
"लक्ष्मी चल, अरे! गऊशाला यहाँ से दो किलोमीटर दूर
है।"
१०.
मानो उनकी एक आँख पूछ रही हो कहो कविता कैसी रही
उत्तर:
मानो, उनकी एक आँख पूछ रही हो- 'कहो,
कविता कैसी रही?'
(२) निम्नलिखित विरामचिह्नों का उपयोग करते हुए बारह-पंद्रह वाक्यों का
परिच्छेद लिखिए :
|
विरामचिह्न |
वाक्य |
|
। |
रमेश प्रतिदिन समय पर विद्यालय जाता
है। |
|
- |
हमें अपने सुख-दुख में हमेशा धैर्य
रखना चाहिए। |
|
? |
क्या तुमने आज का गृहकार्य पूरा कर
लिया है? |
|
; |
कल विद्यालय में छुट्टी है; इसलिए
आज सभी बच्चे बहुत प्रसन्न हैं। |
|
, |
बाज़ार से आम, सेब,
केले और संतरे लेकर आना। |
|
! |
अरे! इतना विशाल और सुंदर भवन मैंने
पहले कभी नहीं देखा। |
|
‘ ’ |
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘गोदान’ एक
अमर उपन्यास है। |
|
“ ” |
अध्यापक ने कहा, “परिश्रम
ही सफलता की एकमात्र कुंजी है।” |
|
× × × |
गुप्त दस्तावेज़ की संख्या ... गोपनीय
कारणों से × × × रखी गई। |
|
— o — |
इस प्रकार इस ऐतिहासिक कथा का समापन
हुआ — o
— |
|
....... |
उसने रुकते-रुकते धीमी आवाज़ में कहा, "मैं वहाँ जाना तो चाहता था......." |
|
( ) |
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र
प्रसाद (बिहार निवासी) अत्यंत सरल स्वभाव के थे। |
|
[ ] |
नेताजी ने कहा, "[अपनी मुट्ठी हवा में लहराते हुए] आज़ादी हमें लड़कर ही मिलेगी!" |
|
^ |
भारत हमारा देश है और हम इसके ^नागरिक हैं। |
|
: |
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप
में लिखिए : |
|
-/ |
कार्यालय में कुल -/५००० रुपये का व्यय
दर्ज किया गया है। |
उपर्युक्त सभी विरामचिह्नों का उपयोग
करते हुए एक संबद्ध परिच्छेद:
आज विद्यालय के वार्षिक समारोह का दिन था। मंच पर पहुँचकर मुख्याध्यापक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “परिश्रम ही सफलता की असली कुंजी है।” अचानक सभागार में सभी चौंक गए—अरे! अचानक बिजली क्यों चली गई? कुछ क्षण बाद जब प्रकाश वापस आया, तब शिक्षक महोदय ने मुस्कुराकर पूछा, “क्या आप सभी इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पूरी तरह तैयार हैं?” छात्रों ने तुरंत उत्तर दिया; उनका उत्साह देखते ही बनता था। मंच पर नाटक के दौरान मुख्य पात्र ने प्रवेश किया [गंभीर मुद्रा में सिर झुकाए हुए] और अपना संवाद शुरू किया। नाटककार ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘ईदगाह’ का मंचन करवाया था, जिसमें हामिद की दादी (अमीना) के प्रति उसका अपार प्रेम दर्शाया गया था। सभागार में बैठे माता-पिता, शिक्षक, छात्र और अतिथि सभी मंत्रमुग्ध होकर यह दृश्य देख रहे थे। पात्र ने रुकते हुए काँपती आवाज़ में कहा, "दादी, मैं तुम्हारे लिए चिमटा लाया हूँ......." तभी दृश्य बदला और मंच पर कुछ गोपनीय संवाद × × × के रूप में संकेतित किए गए। नाटक के सफल अंत पर मुख्य अतिथि ने विशेष घोषणा की : सभी मेधावी छात्रों को -/५००० रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। हमारे विद्यालय का यह समारोह अत्यंत सुख-दुख और सीख से भरा यादगार पल ^बन गया। इस प्रकार तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ — o —
Lakshmi class 10 Navneet digest solutions 10th std Hindi chapter 2 exercise answers
उपयोजित
लेखन
किसी
पालतू प्राणी की आत्मकथा लिखिए।
उत्तर:
एक पालतू कुत्ते की आत्मकथा
मैं टॉमी हूँ—चार पैरों, सुनहरे बालों और
एक हिलती हुई पूँछ वाला एक साधारण सा प्राणी, जिसे इंसान 'कुत्ता' कहते हैं। संसार मुझे भले ही केवल एक जानवर
समझता हो, पर मेरे लिए यह घर और इसमें रहने वाले लोग ही मेरा
पूरा संसार हैं। आज मैं अपनी जीवन-यात्रा के कुछ पन्ने आपके सामने खोल रहा हूँ।
मेरा जन्म एक छोटे से तबेले के पास
हुआ था। मेरी माँ बहुत दयालु थी, किंतु जब मैं केवल दो महीने का था,
तभी मुझे अपनी माँ और भाई-बहनों से अलग होना पड़ा। एक दिन इस घर के
छोटे बेटे 'आरव' ने मुझे देखा और अपनी
गोद में उठा लिया। वह मुझे अपने घर ले आया। आरंभ में मैं सहमा और डरा हुआ रहता था,
पर आरव और उसके माता-पिता के स्नेह ने मेरा डर मिटा दिया। उन्होंने
मुझे 'टॉमी' नाम दिया, मेरे गले में सुंदर पट्टा बाँधा और घर के एक कोने में मखमली गद्दा बिछाकर
मेरी सोने की व्यवस्था की। धीरे-धीरे मैं उनके परिवार का सबसे लाडला सदस्य बन गया।
मेरा दैनिक जीवन प्रेम और उत्साह
से भरा होता है। सुबह जब घर का मुख्य दरवाज़ा खुलता है, तो मैं पूरे आँगन
में दौड़ लगाकर सबको जगाता हूँ। आरव के स्कूल जाते समय मैं दरवाज़े तक उसे विदा
करने जाता हूँ और दोपहर में जब वह लौटता है, तो खुशी से अपनी
पूँछ हिलाते हुए उसके पैरों से लिपट जाता हूँ। उसके साथ गेंद खेलना, बगीचे में दौड़ना और शाम को टहलने जाना मेरे दिन के सबसे प्रिय क्षण होते
हैं। वे मुझे समय पर दूध, रोटियाँ और पौष्टिक भोजन देते हैं
तथा बीमार पड़ने पर तुरंत चिकित्सक के पास ले जाते हैं।
प्रेम के साथ-साथ मैं अपने कर्तव्य
को भी भली-भाँति समझता हूँ। रात के सन्नाटे में जब पूरा घर गहरी नींद में सो जाता
है, तब मेरी आँखें और कान सतर्क रहते हैं। ज़रा सी आहट या किसी अजनबी की परछाईं
देखते ही मैं भौंककर सबको सावधान कर देता हूँ। स्वामीभक्ति और वफादारी मेरे रक्त
में बसी है। अपने मालिक की सुरक्षा के लिए मैं अपने प्राण भी दाँव पर लगा सकता
हूँ।
यद्यपि मुझे बहुत प्यार मिला है, फिर भी जब मैं सड़क पर अपने बेसहारा साथियों को ठंड में ठिठुरते, भूखे भटकते या इंसानों के पत्थरों की चोट सहते देखता हूँ, तो मेरा हृदय भर आता है। हम बोल नहीं सकते, पर पीड़ा और स्नेह का अनुभव इंसानों जितना ही करते हैं। मैं ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ कि मुझे ऐसा संवेदनशील परिवार मिला। मेरी बस यही अभिलाषा है कि अपनी अंतिम साँस तक मैं इसी निष्ठा और प्रेम से अपने मालिक की सेवा करता रहूँ।
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