10. अपराजेय स्वाध्याय इयत्ता नववी हिंदी | Aparajey class 9 question answer

इयत्ता नववी हिंदी स्वाध्याय10 इयत्ता 9वी हिंदी लोकभारती Std 9 Hindi Chapter 10 Aparajey Question Answer Maharashtra Board
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Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions | Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 10

 

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संभाषणीय

विद्यालय में आते समय आपको रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त कोई महिला दिखी। आपने उसकी सहायता की, इस घटना का वर्णन कीजिए :-

कृति के लिए आवश्यक सोपान :-

·    दुर्घटना किस रास्ते पर हुई पूछें।

·   महिला घायल होने का कारण बताने के लिए कहें।

·   महिला के घरवालों तक समाचार पहुँचाने के लिए किए गए उपाय कहलवाएँ।

·   घायल महिला पर क्या प्रथमोपचार किए गए, बताने के लिए कहें।

उत्तर:

        रोज की तरह स्कूल से आते वक्त सामने से आवाज आई और जब मैं वहां देखने गया तो देखा कि एक महिला खून से लथपथ पड़ी है। वहाँ लोगों की भारी भीड़ थी। महिला किसी वाहन की चपेट में आने से कुचल गई। सब सिर्फ देख रहे थे; कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। मैंने महिला के घाव को रूमाल से धोया, उसे पानी से साफ किया, एंबुलेंस बुलाई और उसे अस्पताल ले गया। कुछ ही देर में उसे होश आया और उसने अपने परिजनों को फोन किया। उसके परिवार वाले आये ओर उसके बाद, मैं घर चला गया।

 

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श्रवणीय

हेलन केलर की जीवनी का अंश सुनिए और मुख्य मुद्दे सुनाइए।

उत्तर:

            हेलन केलर की जीवनी का अंश सुनिए और मुख्य मुद्दे सुनाइए। हेलन केलर एक अमेरिकी लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता और आचार्य थीं। वह कला स्नातक की उपाधि अर्जित करने वाली पहली बधिर और दृष्टिहीन थी। हेलन की चमत्कार लगने वाली कहानी ने अनेक फिल्मकारों को आकर्षित किया। हिंदी में २००५ में संजय लीला भंसाली ने इसी कथानक को आधार बनाकर थोड़ा परिवर्तन करते हुए एक फिल्म बनाई। समाजवादी दल के एक सदस्य के रूप में हेलन केलरने अमेरिकी और दुनिया भर के श्रमिकों और महिलाओं के मताधिकार, श्रम अधिकारों, समाजवाद और कट्टरपंथी शक्तियों के खिलाफ अभियान चलाया।

 

लेखनीय

"कला की साधना जीवन के दुखमय क्षणों को भुला देती है" इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर:

            कला मनुष्य जीवन का आधार है। व्यक्ति को जिस कला में रूचि होती है; उस कला में व्यस्त हो जाना उसे अच्छा लगता है। व्यक्ति अपनी कला की साधना के लिए अपने जीवन के दुखमय क्षणों को भूल जाता है। अपनी सारी यातना एवं पीड़ा सब कुछ भूल जाता है। यहाँ तक कि उसे खाने-पीने का भी होश नहीं रहता। वह सिर्फ अपनी कला के बारे में ही सोचता रहता है। अपनी मनचाही कला में निपुण होने के लिए वह दिन रात एक कर देता है। उसके जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य बन जाता है। वह है कला की साधना।

 

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पठनीय

सुदर्शन की 'हार की जीत' कहानी पढ़िए।

उत्तर:

 

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

१) संजाल पूर्ण कीजिए :

 


उत्तर:

 


२) रिक्त स्थान पूर्ण कीजिए :


घर के पीछे

उत्तर: फलों के पेड


घर के आगे

उत्तर: फुलोंका बगीचा

 

३) परिच्छेद से ऐसे दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।

उत्तर:

१. जीवन

२. मौसम

 

४) 'कला में अभिरुचि होने से जीवन का आनंद बढ़ता है' अपने विचार लिखिए।

उत्तर:

कला में अभिरुचि होने से जीवन अधिक सुंदर और आनंदमय बन जाता है। संगीत, नृत्य, चित्रकला, नाटक आदि कलाएँ मनुष्य के मन को प्रसन्न करती हैं। जब व्यक्ति किसी कला में रुचि लेता है, तो उसका मन तनाव और चिंता से दूर रहता है। कला हमें अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का अच्छा माध्यम देती है।

कला के माध्यम से मनुष्य की रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति भी बढ़ती है। यह हमारे जीवन में खुशी, उत्साह और संतुलन लाती है। इसलिए कहा जाता है कि कला में अभिरुचि होने से जीवन का आनंद और भी बढ़ जाता है।

 

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आसपास

कलाक्षेत्र में 'भारतरत्न' उपाधि से अलंकृत महान विभूतियों के नाम, क्षेत्र, वर्षानुसार सूची बनाइए।

उत्तर:


नाम

क्षेत्र

वर्ष

सत्यजीत रे

फिल्म निर्माता

1992
d 5th 12th

एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी

शास्त्रीय गायिका

1998

पंडित रवि शंकर

सितार वादक

1999

D
लता मंगेशकर

गायिका

2001

 

नाम

क्षेत्र

वर्ष
12th

उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ

शहनाई वादक

15tht
2001

पंडित भीमसेन जोशी

शास्त्रीय गायक
Arll

2008

Dig
भूपेन हजारिका

गायक, संगीतकार,
फिल्म निर्माता

2019

 

Lokbharti Chapter 10 अपराजेय Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers. | Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 10 अपराजेय Textbook Questions and Answer

मौलिक सृजन

'समाज के जरुरतमंद लोगों की मैं सहायता करूँगा' विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर:

            मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज से ही उसकी पहचान बनती है। वहीं रहकर उसकी सभी आवश्यकताएँ पूर्ण होती हैं। इसलिए समाज के प्रति उसका भी कुछ उत्तरदायित्व बनता है। मैं इस तथ्य से भली-भाँति परिचित हूँ। अतः मैं बड़ा होने पर, सक्षम होने पर समाज के लिए अवश्य कुछ करूंगा। जब, जहाँ, किसी को भी, किसी तरह की सहायता की आवश्यकता होगी, मैं अवश्य करूंगा। शारीरिक सहायता की आवश्यकता हो या मनोवैज्ञानिक या फिर आर्थिक, मैं कभी भी पीछे नहीं हटूंगा। ऐसा मेरा दृढ़ संकल्प है।

 

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पाठ से आगे

दिव्यांग महिला खिलाड़ियों के, बारे में जानकारी प्राप्त करके टिप्पणी तैयार कीजिए।

उत्तर:

            दिव्यांग महिला खिलाड़ियों के बारे में जानकारी

 

१. प्रज्ञा घिल्डियाल :

            महिला एथलीट प्रज्ञा १०० प्रतिशत लोकोमोटर से पीड़ीत हैं। उन्होंने २०१४ में एफएजेडजेडए अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स तथा २०१६ में दुबई शारजाह इंटरनेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सात पदक जीते।


२. मालथी कृष्णामूर्ति होला :

            बेंगलुरु की इस अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलिट को एक साल की उम्र में लकवा मार गया था। नियमित उपचार के बाद उनके ऊपरी शरीर की शक्ति वापस आ गई लेकिन निचला भाग अभी भी कमजोर है। होला ने खेलों में भाग लेना शुरू किया और बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया। डेनमार्क में हुए वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में उन्होंने २०० मीटर दौड़, शॉटपुट, डिस्कस और जैवलिन थ्रे में स्वर्ण पदक जीतें। आज उनके पास करीब ३०० मेडल्स हैं। होला को पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

 

३. जानकी गौंड :

            जानकी गौंड ने उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग और मूक बधिर जूडो एशियन चैंपियनशिप २०१७ में आयोजित भारतीय महिला टीम का नेतृत्व किया, जिसमें थाईलैंड, कोरिया और उज्बेकिस्तान को हराकर भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता है।

 

पाठ के आँगन में

(१) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

 

(क) केवल एक शब्द में उत्तर लिखिए :

१. जिनमें चल - फिरने की क्षमता का अभाव हो -

२. जिनमें सुनने की क्षमता का अभाव हो -

३. जिनमें बोलने की क्षमता का अभाव हो -

४. स्वस्थ शरीर में किसी भी एक क्षमता का अभाव होना –

उत्तर:

१. जिनमें चल - फिरने की क्षमता का अभाव हो - पंगु

२. जिनमें सुनने की क्षमता का अभाव हो - बधिर

३. जिनमें बोलने की क्षमता का अभाव हो - मूक

४. स्वस्थ शरीर में किसी भी एक क्षमता का अभाव होना – अपंग

 

(ख) पाठ में प्रयुक्त वाक्य पढ़कर व्यक्ति में निहित भाव लिखिए :

१. 'टाँग ही काटनी है तो काट दो।'

उत्तर : इस कथन के द्वारा पता चलता है कि अमरनाथ जी परेशानियों से घबराने वाले इन्सान नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि उनके स्वास्थ्य के लिए उनके परिवार के लोग परेशान हों।

 

२. 'मैं जानता हूँ कि, जीवन का विकास पुरुषार्थ में हैं, आत्महीनता में नहीं।'

उत्तर:

            इस वाक्य से अमरनाथ की सकारात्मक सोच का पता चलता है। दुर्घटना के बाद उनकी टाँग काटी गई, फिर भी उन्होंने जीवन से संघर्ष करना छोड़ा नहीं। उन्होंने चित्रकारी और बागबानी को अपने जीने का जरिया बना लिया। फिर उनकी दाई बाँह काट दी गई। फिर भी उन्होंने जीवन से हार नहीं मानी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया, लेकिन बीमारी की वजह से उनकी आवाज भी चली गई।

            जीवन में इतना सब कुछ खो देने के बावजूद अमरनाथ अपनी स्थिति से दुखी नहीं थे। वे दृढ़निश्चयी व अपराजेय थे। उन्होंने जीवन को अपने अनुसार व्यतीत करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी, क्योंकि वे जानते थे कि जीवन का विकास पुरुषार्थ में है, आत्महीनता में नहीं।

 

(२) 'हीन' शब्द का प्रयोग करके कोई तीन अर्थपूर्ण शब्द तैयार करके लिखिए :-

जैसे - जैसे- आत्म + हीन =      आत्महीन

·       धन + हीन   = धनहीन

·       जन + हीन   = जनहीन   

·       महत्त्व + हीन = महत्त्वहीन

 

(३) 'परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करने में ही जीवन की सार्थकता है', स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

            कहा जाता है कि मनुष्य परिस्थितियों के हाथ में एक कठपुतली के समान होता है। यह कहावत एक साधारण मानव के लिए सही हो सकती है। परंतु इस पृथ्वी पर ऐसे भी अनेक मनुष्य हैं, जो किसी भी हालत में परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। अमरनाथ जी ,के जीवन में ऐसा ही हुआ। पहले उनकी टाँग काटनी पड़ी। फिर उन्होंने चित्रकला को अपना साथी बनाया। उसी में खुश रहते। उनकी दाई बाँह निर्जीव हो गई, अतः उसे भी काटना पड़ा। अब अमरनाथ जी अपना संगीत का शौक पूरा करने लगे। बीमारी के ,दौरान उनकी आवाज चली गई। तब भी उन्होंने परिस्थितियों से ,हार नहीं मानी। वे बाहर बगीचे में बैठकर प्राकृतिक दृश्यों का ,आनंद लेते हैं। प्रसिद्ध संगीतज्ञों के कैसेट सुनते हैं। ,अभी भी पूर्ववत प्रसन्न रहते हैं।  


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